कल सूरज उगते ही ढल जाएगा ।
भरी रोशनी मैं अंधेरों से भर जाएगा
सुबह की शक्ल मैं रात का अक्स होगा
रोशनी और तीरगी के बीचएक खुबसूरत सा रक्स होगा ।
हम तुम जिस अंधेरे से डरा करते हैं वो
कल पल भर के लिए दिन की हकीकत होगा ।
Tuesday, July 21, 2009
विदेशी सामान कितना खतरनाक
मुझे पहले लगता था की मैं एक देशभक्त हूँ लेकिन हाल हिन् मैं कुछ सुना मैंने जिससे लगा की मैं देशभक्त नहीं स्वार्थी हूँ जो चीजें खरीदते समय इस बात का धयान नहीं रखता की इससे देश की आर्थिक दशा पर क्या प्रभाव पड़ेगा , हमें अक्सर चीजें खरीदते समय कम से कम पहले अपने देश की बनी चीजों पर पहले नज़र डालनी होगी ,अब लक्स साबुन को हीं लीजिये १५ रुपये का एक आता है और लागत २ रुपए की होती है बाकी १० रुपए अमेरिका को चला जाता है ,जूतेबनने वाली कंपनी बाटा १०० रुपए खर्च करती है और ६०० सौ मैं बेचती है ५०० रुपए ब्रिटेन को जाती है ,लगभग आप समझ लीजिये ५ लाख करोड़ रुपए ५००० विदेशी कम्पनी अपना मुनाफा कमा के ले जाती है ,और हम १ डौलर के बदले ५० रुपए विदेशियों को दे देते हैं , मतलब हम ५० गुना सस्ता सामन बहार के देशों मैं अपना सामान बेच रहे हैं और ५० गुने महंगे सामान विदेशों से खरीद रहे हैं । तो हमें जागरूक होना होगा और देसी सामानों का उपयोग करना होगा तभी हम अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों से आगे निकल पाएंगे नहीं तो हमारी आगे की पुस्तें कनाडा और अमेरिका मैं गुलामी करते नज़र आयेंगे और इधर हम विदेशी लोगों की गुलामी अपने हीं देश मैं करते नज़र आयेंगे .
Monday, July 20, 2009
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